तेरी तस्वीर


तेरी तस्वीर नही है मेरे पास
तेरा दीदार कैसे करू
तू इश्क है किसी और का
तुजसे प्यार कैसे करू
तू जब मुस्कुराए तो आसमान खिल उठता है
जब हंसे तो आतिस्बाजी हो जाए 
तेरी आवाज़ सुनते ही ऋतुएं बदल जाती है
पर न बदले तेरी बातें और न तू
नही चाहता की तुझे हिचकियां परेशान करे
कमबख्त तुझे याद भी कैसे करू
गनीमत है कि मेरी यादाश्त की आंखों से दुश्मनी नहीं 
चुकी घंटो आंखे मूंद कर,  देखता हूं तुझे
अनिद्रा तो यूंही बदनाम है
तेरे सपनो मैं मेरे न होने की शिकायत है मुझे
हो सकता है तू हो अनजान 
या खबर हो तुझे इस बात की
थोडी हिम्मत जुटाता यदि मैं
तो आज न होती लालसा तेरे साथ की
तेरी तस्वीर नही है मेरे पास
तेरा दीदार मैं फिर भी करता हूं
तस्वीरों का मोहताज मैं नही 
जब मिलना हो आंखे बंद कर लेता हूं

Comments

Post a Comment